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Tu Ban Ja Gali Banaras Ki

Tu Ban Ja Gali Banaras Ki Tu banja gali banaras ki Main shaam talak bhatku tujhme Tu banja gali benaras ki Main shaam talak bhatku tujhme Teri baatein chatpat chaat si hain Teri aankhen ganga-ghaat si hain Main ghaat kinare so jaaun Phir subha subha jaagun tujhme Tu banja gali banaras ki Main shaam talak bhatku tujhme Mere chand guzar meri khidki se Tujhe Maathe pe apne saja lu main Tujhe baandh lu apni zulfon me Tujhe apna ribbon bana lu main Mere chand guzar meri khidki se Tujhe Maathe pe apne saja lu main Tujhe baandh lu apni zulfon me Tujhe apna ribbon bana lu main Tujhe Aise rakhu kabhi khoye nahi kisi aur ka tu kabhi hoye nahi Tujhe paaun to kho jaaun main fir khud ko kahi dhundhu tujhme Tu banja gali banaras ki Main shaam talak bhatku tujhme Mujhe ghar se bhaga le jaa ek din tere saath firu main sailaani Tu hawa hai main ghanghor ghata Mujhe chhed ke kar pani pani Mujhe ghar se bhaga le jaa ek din tere saath firu main sailaani Tu hawa hai

Aaj Se Teri Sari Galiya Mari Ho Gai /आज से तेरी सारी गालियां मेरी

Aaj Se Teri Sari Galiyan आज से तेरी सारी  गलियां मेरी हो गयी आज से मेरा,  घर तेरा हो गया आज से मेरी सारी खुशियाँ, तेरी हो गयीं आज से तेरा गम मेरा हो गया ओ तेरे कंधे का जो तिल है ओ तेरे सीने में जो दिल है ओ तेरी बिजली का जो बिल है आज से मेरा हो गया!! ओ मेरे ख्वाबों का अम्बर ओ मेरी खुशियों का समन्दर ओ मेरे पिन कोड का नम्बर आज से तेरा हो गया तेरे मांथे.. तेरे मांथे के कुमकुम को मैं तिलक लगा के घूमूँगा तेरी बाली की छुन छुन को मैं दिल से लगा के झुमुँगा मेरी छोटी सी भूलों को तू नदिया में बहा देना तेरे जुड़े के फूलों को मैं अपनी शर्ट में पहनूँगा बस मेरे लिए तु माल पुए कभी कभी बना देना आज से मेरी सारी रतियाँ, तेरी हो गयीं आज से तेरा दिन मेरा हो गया ओ तेरे कंधे का जो तिल है ओ तेरे सीने में जो दिल है ओ तेरी बिजली का जो बिल है आज से मेरा हो गया ओ मेरे ख्वाबों का अम्बर ओ मेरी खुशियों का समन्दर ओ मेरे पिन कोड का नम्बर आज से तेरा हो गया तू मांगे सर्दी में अमिया जो मांगे गर्मी में मुंगफलियां तू बारिश में अगर कहदे जा मेरे लिए तू धुप खिला तो मैं सूर

अगर खिलाफ है होने दो / Agar khilaf hai hone do......

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है - राहत इन्दौरि

Mana ke musht-e-khaq se / माना के मुश्त-ए-ख़ाक से

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माना के मुश्त-ए-ख़ाक से बढ़कर नहीं हूँ मैं लेकिन हवा के रहम-ओ-करम पर नहीं हूँ मैं इंसान हूँ धड़कते हुये दिल पे हाथ रख यूँ डूबकर न देख समुंदर नहीं हूँ मैं चेहरे पे मल रहा हूँ सियाही नसीब की आईना हाथ में है सिकंदर नहीं हूँ मैं ग़ालिब तेरी ज़मीन में लिक्खी तो है ग़ज़ल तेरे कद-ए-सुख़न के बराबर नहीं हूँ मैं (मुश्त-ए-ख़ाक = एक मुट्ठी धूल) (कद-ए-सुख़न = काव्य की ऊँचाई)

Charag-o-aafatab / चराग़-ओ-आफ़ताब गुम

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चराग़-ओ-आफ़ताब गुम, बड़ी हसीन रात थी शबाब की नक़ाब गुम, बड़ी हसीन रात थी मुझे पिला रहे थे वो, कि खुद ही शमा बुझ गई गिलास गुम शराब गुम, बड़ी हसीन रात थी लिखा था जिस किताब में, कि इश्क़ तो हराम है हुई वही किताब गुम, बड़ी हसीन रात थी लबों से लब जो मिल गए, लबों से लब ही सिल गए सवाल गुम जवाब गुम, बड़ी हसीन रात थी

Mere jindagi kisi aur ki / मेरे नाम का कोई और है

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मेरी ज़िन्दगी किसी और की, मेरे नाम का कोई और है मेरा अक्स है सर-ए-आईना, पस-ए-आइना कोई और है (सर-ए-आईना = आईने के सामने), (अक्स = प्रतिबिम्ब, परछाई), (पस-ए-आइना = आईने के पीछे) मेरी धड़कनों में है चाप सी, ये जुदाई भी है मिलाप सी मुझे क्या पता, मेरे दिल बता, मेरे साथ क्या कोई और है (चाप = तेज़ आवाज़) न गए दिनों को ख़बर मेरी, न शरीक-ए-हाल नज़र तेरी तेरे देस में, मेरे भेस में, कोई और था कोई और है वो मेरी तरफ़ निगराँ रहे, मेरा ध्यान जाने कहाँ रहे मेरी आँख में कई सूरतें, मुझे चाहता कोई और है न मकाम का, न पड़ाव का, ये हयात नाम बहाव का मेरी आरज़ू न पुकार तू, मेरा रास्ता कोई और है

Mere rashk-e-qamar / मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र

मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया… बर्क सी गिर गयी काम ही कर गयी आग ऐसी लगायी मज़ा आ गया जाम में घौल कर हुस्न की मस्तियाँ चांदनी मुस्कुराई मज़ा आ गया चाँद के साए में ऐ मेरे साकिया तू ने ऐसी पिलाई मज़ा आ गया नशा शीशे में अंगड़ाई लेने लगा बज़्म रिन्दान में सागर खनकने लगा मैकदे पे बरसने लगी मस्तियाँ जब घटा गिर के छाई मज़ा आ गया वो बे हिजबाना वो सामने आ गए और जवानी जवानी से टकरा गयी और जवानी जवानी से टकरा गयी आँख उनकी लड़ी यूँ मेरी आँख से आँख उनकी लड़ी यूँ मेरी आँख से देख कर ये लड़ाई मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया आँख में ठी हया हर मुलाक़ात पर सुर्ख आरिज़ हुए वसल की बात पर सुर्ख आरिज़ हुए वसल की बात पर उसने शर्मा के मेरे सवालात पे उसने शर्मा के मेरे सवालात पे ऐसे गर्दन झुकाई मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया बर